
30 जुलाई 2008, एक दिन जो पुलिस के लिए बहुत खराब हो सकता था। एक दिन जो पुलिस के लिए और भी उलझन भरा हो सकता था, लेकिन शुक्रिया उन ग्रामीण युवकों का जिन्होनें साहस का परिचय दिया और सभी बदमाशों को दबोचा। अब समय आ गया है कि अपराध की रोकथाम की जिम्मेदारी न केवल खाकी लेगी बल्कि घटना बयान कर रही है कि समाज के नागिरक भी अपराध और अपराधियों की रोकथाम के लिए कंधे से कंधा मिलाने को तैयार हैं। आज बहादुरी और बहादुरों का दिन था। सही समय पर तत्परता से लिए गए निर्णय के कारण ही इतनी बड़ी दुःसाहसिक वारदात का खुलासा हुआ और सभी बदमाश पकड़े भी गए। एक मौका जो मिसाल बन गया पुलिस और जनता की भागीदारी का। कुंवरपाल, रामवीर, वीरपाल, ओमवीर, किशनपाल और पट्ठा सिंह अब यह साधारण नाम नहीं रहे। इलाके के नायक हैं। इनकी कहानी फिल्मी पर्दे पर नियंत्रित स्थितियों में दिखाया गया कोई करतब नहीं बल्कि जांबाजी का जिंदा उदाहरण है। प्रशासन इन्हें खुद शस्त्र लाइसेंस दे रहा है। मैं इन युवकों में साधारण वस्त्रों में पुलिस की मौजूदगी देख रहा हूं। मुझे विश्वास है कि इनके हाथों में हथियार नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठेगा। पूरे जिले के नागिरक इनसे प्रेरणा लेते हुए अपराधों की रोकथाम के लिए तत्पर रहेंगे। यही तो है सुरक्षित अलीगढ़, संरक्षित अलीगढ़ का मूलभाव..यही है आई लव अलीगढ़-शहर को सुरक्षित बनाने का अभियान ।
असीम अरुण
एसएसपी अलीगढ़

