Wednesday, July 30, 2008

नागरिकों के साहस को मेरा प्रणाम



30 जुलाई 2008, एक दिन जो पुलिस के लिए बहुत खराब हो सकता था। एक दिन जो पुलिस के लिए और भी उलझन भरा हो सकता था, लेकिन शुक्रिया उन ग्रामीण युवकों का जिन्होनें साहस का परिचय दिया और सभी बदमाशों को दबोचा। अब समय आ गया है कि अपराध की रोकथाम की जिम्मेदारी न केवल खाकी लेगी बल्कि घटना बयान कर रही है कि समाज के नागिरक भी अपराध और अपराधियों की रोकथाम के लिए कंधे से कंधा मिलाने को तैयार हैं। आज बहादुरी और बहादुरों का दिन था। सही समय पर तत्परता से लिए गए निर्णय के कारण ही इतनी बड़ी दुःसाहसिक वारदात का खुलासा हुआ और सभी बदमाश पकड़े भी गए। एक मौका जो मिसाल बन गया पुलिस और जनता की भागीदारी का। कुंवरपाल, रामवीर, वीरपाल, ओमवीर, किशनपाल और पट्ठा सिंह अब यह साधारण नाम नहीं रहे। इलाके के नायक हैं। इनकी कहानी फिल्मी पर्दे पर नियंत्रित स्थितियों में दिखाया गया कोई करतब नहीं बल्कि जांबाजी का जिंदा उदाहरण है। प्रशासन इन्हें खुद शस्त्र लाइसेंस दे रहा है। मैं इन युवकों में साधारण वस्त्रों में पुलिस की मौजूदगी देख रहा हूं। मुझे विश्वास है कि इनके हाथों में हथियार नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठेगा। पूरे जिले के नागिरक इनसे प्रेरणा लेते हुए अपराधों की रोकथाम के लिए तत्पर रहेंगे। यही तो है सुरक्षित अलीगढ़, संरक्षित अलीगढ़ का मूलभाव..यही है आई लव अलीगढ़-शहर को सुरक्षित बनाने का अभियान ।


असीम अरुण


एसएसपी अलीगढ़

Tuesday, July 22, 2008

सुरक्षित अलीगढ़-संरक्षित अलीगढ़ के लिए सिर्फ इतना करें

1. प्रत्येक किराएदार का पुलिस सत्यापन कराएं। हो सकता है किराएदार कोई अपराधी हो।

२. अफवाहों पर कोई ध्यान न दें। अफवाहें फैलाने वालों के बारे में पुलिस को सूचित करें।

3. स्वयं कानून का पालन करें और दूसरों से भी आग्रह करें।

४. घर में ताला लगाकर बाहर जा रहे हैं तो संबंधित पुलिस थाने को सूचना दें ताकि पुलिस निगरानी कर सके।

5. अपने वाहन की सुरक्षा स्वयं करें। दुपहिया वाहन में व्हील लॉक जरूर लगवाएं। चार पहिया वाहन में गेयर बॉक्स लॉक होना चाहिए।

६.. दोपहर के समय जब महिलाएं घर में अकेली होती हैं तो कंपनी के प्रचार के नाम पर लोग सामान बेचने आते हैं। इनके लिए घर के द्वार कतई न खोलें। जिनसे कोई जान-पहचान नहीं है, उन्हें अपने घर में क्यों घुसाएं।

7. व्यापारियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का लेपर्ड दस्ता हर समय मौजूद है। नकदी या अन्य कोई कीमती सामान ले जा रहे हैं तो पुलिस को जरूर याद करें।

Monday, July 21, 2008

आई लव अलीगढ़

कितना अच्छा लगता है जब कोई हमसे कहता है- आई लव यू। मन प्रफुल्लित हो जाता है। रोम-रोम पुलिकत हो जाता है। शहर का रामघाट रोड, जीटी रोड, सेंटर प्वाइंट, ऊपर कोट, सिविल लाइंस, क्वार्सी, सुरेंद्र नगर, मान सरोसवर, कठपुला, घंटाघर, सासनी गेट, जयगंज, आगरा रोड, एएमयू कैम्पस... समेत हर कोना हमें प्यार करता है। फिर हम अपने शहर को प्यार क्यों नहीं करते हैं। आप कहेंगे कि शहर को कैसे प्यार कर सकते है, तो हम बताते हैं कि कैसे प्यार करना है। यातायात नियमों का पालन करें, इधर-उधर गंदगी न फैलाएं, कहीं भी न थूकें, प्रसाधन सुविधाओं का उपयोग करें, घर का कूड़ा नाले-नाली में न डालें और सफाई की ओर स्वयं ध्यान दें। इस तरह हम अपने शहर से प्यार का प्रकटीकरण कर सकते हैं। इसके साथ ही हम नारा लगाएं- आई लव अलीगढ़यह अभियान एक आंदोलन का रूप लेगा। हम सब इसमें प्रतिभाग करेंगे। जन-जन कहेगा-

आई लव अलीगढ़।

तो देर किस बात की है। आइए, स्वयं से शुरू करते हैं आई लव अलीगढ़ का सार्थक अभियान।

सादर

असीम अरुण

एसएसपी, अलीगढ़।

सुरक्षित अलीगढ- संरक्षित अलीगढ


बचपन में स्कूल की प्रार्थना के बाद बहुत से नारे लगते थे। इनमें से दो नारे मैं आज तक नहीं भूला हूँ। ये हैं - हम सुधरेंगे-जग मुधारेगा। देश की रक्षा कौन करेगा - हम करेंगे, हम करेंगे, हम करेंगे। ये नारे आज भी प्रासंगिक हैं। अगर हम अपना-अपना कर्तव्य ठीक से निभाते रहेंगे तो बहुत सी समस्याओं का हल स्वयमेव हो जाएगा। हम सुधरेंगे-जग सुधरेगा के पीछे भाव भी यही है।
जहाँ तक देश की बात है तो यह प्रदेश, मंडल, जिला, गांव, मोहल्ला और इनमें रहने वाले लोगों तथा उनकी मिली-जुली संस्कृति सुंदर समन्वय से बनता है। इसलिए हम सब देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम जहाँ हैं, वहां सब कुछ सेफ- सुरक्षित रखना एक तरह से देश की सेवा करना है। तो आइये, अपने शहर को सेफ -सुरक्षित करके देश की सेवा में अपना हाथ बटाइए।
अपने ऐतिहासिक शहर अलीगढ को लेकर हर कोई आशंकित है। सबके मन में असुरक्षा का वातावरण घर किए रहता है। हमने बहुत बदनामी सह ली। प्रण कीजिये कि आज से, अभी से अपने अलीगढ को हर दृष्टि से सुरक्षित बनायेंगे। हम पुराने घाव नहीं कुरेदेंगे। अपने आसपास नज़र रखेंगे। कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देता है तो तत्काल निकटस्थ पुलिस थाने को सुचना देंगे। आपका नाम गुप्त रखने कि गारंटी मैं लेता हूँ। अफवाहें फैलाने को आप स्वयं फटकारें। फ़िर हम गर्व से कह सकेंगे-
''सुरक्षित अलीगढ- संरक्षित अलीगढ''
इस दिशा में आपके सुझाव सादर आमंत्रित हैं। बिना आपके सहयोग के कुछ भी संभव नहीं है। हमें बताइए कि हम क्या करें सुरक्षित अलीगढ- संरक्षित अलीगढ का सपना साकार हो सके । हमें पूरी दुनिया को बताना है कि हमारा अलीगढ हर दृष्टि से सुरक्षित है
जय हिन्द
असीम अरुण
एसएसपी, अलीगढ़