Sunday, August 23, 2009

अलीगढ के नए डी आई जी

अलीगढ के डी आई जी श्री विजय प्रताप सिंह हैं। तकनीकी खामियों के चलते पूर्व डी आई जी श्री बृज भूषण का फोटो नहीं हटाया जा सका है। इसके लिए हमें खेद है।
असीम अरुण
एसएसपी
अलीगढ

Sunday, April 19, 2009


अलीगढ़ शहर प्राचीन व सुंदर इमारतों का शहर है, लेकिन वाल पेंटिंग , पोस्टर आदि अवैध विज्ञापन सामग्री पर अभी तक रोक टोक न होने के कारण शहर की सुन्दरता पर धब्बे लगे हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद दीवारों से हटाई गई राजनैतिक प्रचार सामग्री से दीवारें साफ़ दिखने ही लगी थी फिर से अन्य लोगों ने गन्दा करना शुरू कर दिया। यदि हम अपने शहर को सुंदर व साफ़ बनाना चाहते हैं तो आवश्यक है कि भवनों व दीवारों को ख़राब न होने दें।

वैसे तो पूरे जनपद में अभियान चलाकर सुधार करने की आवश्यकता है , व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए शहर के एक केन्द्र बिन्दु से इसकी शुरुआत की जा रही है । सिविल लाइंस की निम्न सड़कों पर स्थित भवनों , सड़कों , खम्बों, को अवैध प्रचार सामग्री से मुक्त करने के लिए अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान में अवैध प्रचार सामग्री लगाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही अमल में लायी जा रही है।

यह अभियान जिला प्रशासन , नगर निगम , व अलीगढ़ पुलिस द्वारा सयुक्त रूप से चलाया जा रहा है। दोषी व्यक्ति के विरुद्ध उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम १९५९ तथा लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

शहर के सम्मानित नागरिकों से अनुरोध है अपने शहर को सुंदर बनाने में पुलिस व प्रशासन को सहयोग दें।

असीम अरुण

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

Friday, March 27, 2009

नए रूप में सेवा १-०-०

प्रजातांत्रिक व्यवस्था मे प्रत्येक नागरिक को अधिकार है कि जब भी उसे पुलिस सहायता की आवश्यकता हो , उसे तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध होनी चाहिए। इसको दृष्टिगत रखते हुए अलीगढ़ पुलिस सहायता केन्द्र के रूप मे सेवा १-०-० का आरम्भ किया गया है।

जैसे जैसे देश मे संचार प्रणाली का विकास हुआ और नागरिकों के हाथ मे मोबाइल फ़ोन एक घड़ी की तरह आ गया तो एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकताअनुभव हुई कि पुलिस सहायता की आवश्यकता पड़ने पर नागरिकों को पुलिस थाना न जाना पड़े वरन पुलिस यथाशीघ्र मोकें पर पहुँच कर आवश्यक कार्यवाही करे।

सेवा १-०-० की मुख्य बात यह है कि अभी तक यह केवल एक आपात कालीन सेवा प्रणाली समझी जाती थी तथा इसका उपयोग पुलिस थानों मे पंजीक्रत होने वाले अपराधों हेतु, जिनमें तत्काल पुलिस सहायता की आवशयकता न हो, नही किया जाता था, लेकिन नवीन प्रणाली मे नागरिक भिन्न भिन्न प्रकार की आपराधिक घटनाओ हेतु इसका लाभ उठा सकते हैं।

डायल १-०-की समीक्षा कर कमियों में सुधार करते हुए अलीगढ़ पुलिस द्वारा पुलिस सहायता सेवा १-०-० को एक नये संशोधित एवं परिमार्जित रूप में लागू करने का प्रयास किया गया है जिसके अंतर्गत तकनिकी विकास के साथ साथ नियंत्रण कक्ष में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मियों की व्यवसायिक क्षमता एवं सोच को आवश्यकता अनुसार विकसित करने का प्रयास किया गया है। कॉल सेंटर का प्रशिक्षण देने वाली दिल्ली की एक एनजीओज अकेडमी द्वारा एक सर्वे कर पुलिस नियंत्रण कक्ष पर आने वाली फ़ोन काल्स तथा कार्य क्षेत्र का अध्ययन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर १०० काल्स ऑपरेटर्स को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण हेतु योग्य पुलिस कर्मियों का चयन परीक्षा आयोजित कर किया गया। पेट्रोल ऑफिसर को संवाद कौशल, नागरिक हित, घटना स्थल पर स्थिति नियंत्रण, त्वरित कार्यवाही आदि का प्रशिक्षण प्रदान कर छोटे असलाह रिवाल्वर, पिस्टल उपलब्धता के अनुसार उपलब्ध कराये जा रहें हैं ताकि समस्त परिस्थितियों में सुविधाजनक रहे।

सेवा १-०-के तहत आने वाली प्रत्येक कॉल को सुव्यवस्थित रूप से सुनकर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर त्वरित कार्यवाही की व्यवस्था की गई है तथा आने वाली प्रत्येक कॉल को रेकॉर्ड किया जाता है। शिकायत को दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रारूप में एक फॉर्म तैयार किया गया है जिसमे शिकायत दर्ज कर शिकायत नम्बर उपलब्ध कराया जाता है ताकि उक्त नम्बर द्वारा वह अपनी शिकायत पर हुई कार्यवाही जान सकें।

अभी फॉर्म की प्रविष्टी पुलिस कर्मियों द्वारा पूर्ण की जा रही है। भविष्य में यह समस्त कार्य कम्प्यूटर द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए एक सॉफ्टवेर विकसित किया जा रहा है। सेवा १-०-० पर आने वाली प्रत्येक कॉल तथा कृत कार्यवाही का प्रय्वेक्षण पुलिस क्षेत्राधिकारी करते हैं।

सेवा १-०-० पर आने वाली प्रत्येक कॉल पर प्रभावी कार्यवाही हेतु तीन टीमों का गठन शिफ्ट के अनुसार किया गया है । प्रत्येक टीम में पर्यवेक्षण अधिकारी , पेट्रोल ऑफिसर तथा कॉल ओपेरटर हैं। पूर्व में पेट्रोल ऑफिसर सम्बंधित थाना के नियंत्रण में कार्य करते थे तथा अपने थाना क्षेत्र के कार्यों को प्राथमिकता देते थे। व्यवस्था में सुधार हेतु सभी पेट्रोल ऑफिसर पुलिस नियंत्रण कक्ष के नियंत्रण में दिए गए हैं। प्रत्येक शिफ्ट से पूर्व ब्रीफिंग द्वारा समस्त पेट्रोल ऑफिसर को उनके कर्तव्यों एवं दायित्वों के साथ साथ महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए जाते हैं।

प्रजातान्त्रिक पुलिस व्यवस्था की दिशा में हमारी भावी योजनायें सीसीटीवी, पेट्रोलिंग वाहनों को जीपीएस डिवाइस से जोड़ना तथा विशेष रूप से डिजाइन की गई मोटर साइकिल पुलिस बल को उपलब्ध कराना है।
असीम अरुण
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
अलीगढ

Saturday, March 21, 2009

बैंक/ फाइनेंस कंपनी एजेंटों द्वारा वाहन रिकवरी हेतु दिशा निर्देश

प्रायः यह देखने में आया है कि फाइनेन्स पर लिए गए वाहनों की रिकवरी हेतु बैंकों द्वारा नियुक्त एजेंटों के प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में नियमों का पालन नही हो रहा है जिसके कारण एजेन्ट मनमाना आचरण करते हैं जिससे पुलिस की छवि ख़राब होती है। आई सी आई सी आई बैंक द्वारा दाखिल एक याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय पारित किया गया कि लोन वसूली हेतु अथवा किश्त का भुगतान न करने पर गाड़ियों को वापस लेने की प्रक्रिया केवल वैधानिक तरीके से ही की जा सकती है। बैंक ऐसे प्रकरणों के निस्तारण हेतु गुंडों की नियुक्ति नही कर सकता और न ही उनकी सहायता ले सकता है।
१- यदि बैंक / फाइनेन्स कंपनी एजेंट द्वारा बलपूर्वक वाहन की रिकवरी का मामला प्रकाश में आता है तो पुलिस को जाँच के उपरांत लूट का अभियोग पंजीकृत करना चाहिए।
२- यदि कोई व्यक्ति लोन का भुगतान करने में असफल रहता है तो वाहन की रिकवरी हेतु बैंक अथवा फाइनेंस कंपनी को निम्न प्रक्रिया अपनानी चाहिए -
(क) वाहन को लेने से पहले वाहन स्वामी को ०३ कानूनी नोटिस दिए जाने चाहिए ।
(ख) वाहन को सड़क पर दौड़ने की स्थिति में रिकवर नही किया जा सकता है बल्कि वाहन यदि किसी विराम स्थल पर खड़ा है तो ही उसे रिकवर किया जा सकता है।
(ग) वाहन को रिकवर करने से पहले बैंक / फाइनेन्स कंपनी द्वारा स्थानीय पुलिस थाना को सूचित करना चाहिए। साथ ही रिकवरी के बाद भी थाना को सूचित किया जाना आवश्यक है।
इस सम्बन्ध में सभी थानों को आवश्यक दिशा निर्देश इस आशय से दे दिए गए हैं ताकि उक्त निर्देशों का गहनता से अध्ययन कर अक्षरश अनुपालन / क्रियान्वयन किया जाए ताकि बैंक / फाइनेन्स कंपनी द्वारा किसी भी दशा में नियम विरुद्ध कार्य न किया जा सके।
नागरिकों से अनुरोध है की "जागो ग्राहक जागो " के आधार पर पुलिस सहायता केन्द्र की सेवा १-०-० का सहयोग प्राप्त करें ।
असीम अरुण
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
अलीगढ

Tuesday, October 7, 2008

आपके सुझावों का इंतजार


अलीगढ़ के सुधी नागरिकों के सहयोग से पुलिस ने सुरक्षित अलीगढ़- संरक्षित अलीगढ़ और आई लव अलीगढ़ अभियान शुरू किया है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसमें हर किसी की भागीदारी की जरूरत है।

उद्देश्य यह है कि हम अपने शहर को सुरिक्षत रखते हुए समृद्ध बना सकें। अपने बहुमूल्य सुझाव हमें दें ताकि हम सब अपने अलीगढ़ शहर को सुखी और संपन्न बना सकें। तो देर किस बात की। मुझे लिखित में दीजिए या संदेश में जाकर दर्ज कीजिए।
मुझे आपके सुझावों का इंतजार है।
सादर,

असीम अरुण

एसएसपी, अलीगढ़

Wednesday, July 30, 2008

नागरिकों के साहस को मेरा प्रणाम



30 जुलाई 2008, एक दिन जो पुलिस के लिए बहुत खराब हो सकता था। एक दिन जो पुलिस के लिए और भी उलझन भरा हो सकता था, लेकिन शुक्रिया उन ग्रामीण युवकों का जिन्होनें साहस का परिचय दिया और सभी बदमाशों को दबोचा। अब समय आ गया है कि अपराध की रोकथाम की जिम्मेदारी न केवल खाकी लेगी बल्कि घटना बयान कर रही है कि समाज के नागिरक भी अपराध और अपराधियों की रोकथाम के लिए कंधे से कंधा मिलाने को तैयार हैं। आज बहादुरी और बहादुरों का दिन था। सही समय पर तत्परता से लिए गए निर्णय के कारण ही इतनी बड़ी दुःसाहसिक वारदात का खुलासा हुआ और सभी बदमाश पकड़े भी गए। एक मौका जो मिसाल बन गया पुलिस और जनता की भागीदारी का। कुंवरपाल, रामवीर, वीरपाल, ओमवीर, किशनपाल और पट्ठा सिंह अब यह साधारण नाम नहीं रहे। इलाके के नायक हैं। इनकी कहानी फिल्मी पर्दे पर नियंत्रित स्थितियों में दिखाया गया कोई करतब नहीं बल्कि जांबाजी का जिंदा उदाहरण है। प्रशासन इन्हें खुद शस्त्र लाइसेंस दे रहा है। मैं इन युवकों में साधारण वस्त्रों में पुलिस की मौजूदगी देख रहा हूं। मुझे विश्वास है कि इनके हाथों में हथियार नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठेगा। पूरे जिले के नागिरक इनसे प्रेरणा लेते हुए अपराधों की रोकथाम के लिए तत्पर रहेंगे। यही तो है सुरक्षित अलीगढ़, संरक्षित अलीगढ़ का मूलभाव..यही है आई लव अलीगढ़-शहर को सुरक्षित बनाने का अभियान ।


असीम अरुण


एसएसपी अलीगढ़