प्रायः यह देखने में आया है कि फाइनेन्स पर लिए गए वाहनों की रिकवरी हेतु बैंकों द्वारा नियुक्त एजेंटों के प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में नियमों का पालन नही हो रहा है जिसके कारण एजेन्ट मनमाना आचरण करते हैं जिससे पुलिस की छवि ख़राब होती है। आई सी आई सी आई बैंक द्वारा दाखिल एक याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय पारित किया गया कि लोन वसूली हेतु अथवा किश्त का भुगतान न करने पर गाड़ियों को वापस लेने की प्रक्रिया केवल वैधानिक तरीके से ही की जा सकती है। बैंक ऐसे प्रकरणों के निस्तारण हेतु गुंडों की नियुक्ति नही कर सकता और न ही उनकी सहायता ले सकता है।
१- यदि बैंक / फाइनेन्स कंपनी एजेंट द्वारा बलपूर्वक वाहन की रिकवरी का मामला प्रकाश में आता है तो पुलिस को जाँच के उपरांत लूट का अभियोग पंजीकृत करना चाहिए।
२- यदि कोई व्यक्ति लोन का भुगतान करने में असफल रहता है तो वाहन की रिकवरी हेतु बैंक अथवा फाइनेंस कंपनी को निम्न प्रक्रिया अपनानी चाहिए -
(क) वाहन को लेने से पहले वाहन स्वामी को ०३ कानूनी नोटिस दिए जाने चाहिए ।
(ख) वाहन को सड़क पर दौड़ने की स्थिति में रिकवर नही किया जा सकता है बल्कि वाहन यदि किसी विराम स्थल पर खड़ा है तो ही उसे रिकवर किया जा सकता है।
(ग) वाहन को रिकवर करने से पहले बैंक / फाइनेन्स कंपनी द्वारा स्थानीय पुलिस थाना को सूचित करना चाहिए। साथ ही रिकवरी के बाद भी थाना को सूचित किया जाना आवश्यक है।
इस सम्बन्ध में सभी थानों को आवश्यक दिशा निर्देश इस आशय से दे दिए गए हैं ताकि उक्त निर्देशों का गहनता से अध्ययन कर अक्षरश अनुपालन / क्रियान्वयन किया जाए ताकि बैंक / फाइनेन्स कंपनी द्वारा किसी भी दशा में नियम विरुद्ध कार्य न किया जा सके।
नागरिकों से अनुरोध है की "जागो ग्राहक जागो " के आधार पर पुलिस सहायता केन्द्र की सेवा १-०-० का सहयोग प्राप्त करें ।
असीम अरुण
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
अलीगढ
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